भारत में महिलाओं के लिए कानून

भारत में यूँ तो महिलाओं को दुर्गा और लक्ष्मी का रूप माना जाता है और नवरात्रों में कन्या पूजन भी किया जाता है लेकिन इन सब के बावजूद भी प्राचीनकाल से ही महिलाओं के साथ बहुत अत्याचार और दुर्व्यवहार होता आ रहा है और ये अभी भी बदस्तूर जारी है और इस सब को रोकने के लिए देश के संविधान में महिलाओं के लिए कई कानून हैं आज हम उनमें से कुछ कानूनों पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे जो कि निम्नलिखित हैं :

संपत्ति पर हक:
कानूनी जानकार बताते हैं कि सीआरपीसी, हिंदू मैरिज ऐक्ट, हिंदू अडॉप्शन ऐंड मेंटिनेंस ऐक्ट और घरेलू हिंसा कानून के तहत गुजारे भत्ते की मांग की जा सकती है। अगर पति ने कोई वसीयत बनाई है तो उसके मरने के बाद उसकी पत्नी को वसीयत के मुताबिक संपत्ति में हिस्सा मिलता है। लेकिन पति अपनी खुद की अर्जित संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है।

घरेलू हिंसा से सुरक्षा:
महिलाओं को अपने पिता के घर या फिर अपने पति के घर सुरक्षित रखने के लिए डीवी ऐक्ट (डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट) का प्रावधान किया गया है। महिला का कोई भी डोमेस्टिक रिलेटिव इस कानून के दायरे में आता है।

लिव-इन रिलेशन में भी डीवी ऐक्ट:
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट के तहत प्रोटेक्शन मिला हुआ है। डीवी ऐक्ट के प्रावधानों के तहत उन्हें मुआवजा आदि मिल सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए देश में नियम तय किए गए हैं। ऐसे रिश्ते में रहने वाले लोगों को कुछ कानूनी अधिकार मिले हुए हैं।

सेक्शुअल हैरेसमेंट से प्रोटेक्शन:
सेक्शुअल हैरेसमेंट, छेड़छाड़ या फिर रेप जैसे वारदातों के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। महिलाओं के खिलाफ इस तरह के घिनौने अपराध करने वालों को सख्त सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। आईपीसी की धारा-375 के तहत रेप के दायरे में प्राइवेट पार्ट या फिर ओरल सेक्स दोनों को ही रेप माना गया है।

वर्क प्लेस पर प्रोटेक्शन:
वर्क प्लेस पर भी महिलाओं को तमाम तरह के अधिकार मिल हुए हैं। सेक्शुअल हैरेसमेंट से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में विशाखा जजमेंट के तहत गाइडलाइंस तय की थीं। इसके तहत महिलाओं को प्रोटेक्ट किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की यह गाइडलाइंस तमाम सरकारी व प्राइवेट दफ्तरों में लागू है। इसके तहत एंप्लॉयर की जिम्मेदारी है कि वह गुनहगार के खिलाफ कार्रवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने 12 गाइडलाइंस बनाई हैं। मालिक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह सेक्शुअल हैरेसमेंट को रोके।

अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरुरी

आज के इस तकनीकी युग में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आपका अपने विचारों को प्रकट करने का तरीका भी बहुत प्रभावशाली होना चाहिए अर्थात आपकी कम्युनिकेशन स्किल बहुत ही बेहतरीन होनी चाहिए विशेषकर अंग्रेजी भाषा पर आपकी पकड़ मजबूत होना बहुत ही जरुरी है क्योंकि अंग्रेजी एक वैश्विक भाषा है चाहे वो संयुक्त राज्य संघ हो या भारत में ही नौकरी प्राप्त करने हेतु आपकी अंग्रेजी बहुत ही बेहतरीन होनी चाहिए, आपके पास बेशक असाधारण विचार होंगे, परंतु यदि अंग्रेजी पर आपकी पकड़ नहीं है तो आपको आपकी मैनेजमेंट भी दरकिनार कर सकती है। वहीं अंग्रेजी में पकड़ कमजोर होने के कारण आपकी कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। सबसे बुरा तो तब होता है, जब एक अंग्रेजी बोलने वाले साधारण सा कर्मचारी आपके विचारों को अपने नाम से ले उड़ते हैं! तो अंग्रेजी का महत्व आप समझ ही गए होंगे?
कम्युनिकेशन स्किल्स हर जगह जरूरी होती हैं, चाहे आप सहकर्मियों से बात करें, ग्राहकों से या अपने सुपरवाइजर के साथ, आपको अपने विचारों, लक्ष्यों आदि को ठीक से व्यक्त करना आना चाहिए। इसलिए यदि आप अंग्रेजी पर पकड़ मजबूत करते हैं और विश्वास के साथ अंग्रेजी में बात करते हैं तो आपकी छवि एक ‘लीडर’ की बनेगी, न कि ‘अनुयायी’ की।
आजकल गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भारतीय छात्रों को नौकरी के अवसर प्रदान करती हैं और भारत में मिलने वाली मासिक आय से कई गुना अधिक आय देती हैं, लेकिन ये तभी संभव है जब तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ छात्रों का अंग्रेजी भाषा पर पकड़ बहुत ही मज़बूत हो क्योंकि ये सारी कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर काम करती हैं तो इनके साथ काम करने के लिए वैश्विक भाषा का आना बहुत ही जरुरी है जो कि अंग्रेजी है इतना ही नहीं यदि आप भारत में भी IAS या IPS बनने का सपना देख रहे हैं तो उसके लिए भी आपकी अंग्रेजी बहुत ही अच्छी होनी चाहिये अन्यथा आपका सपना सपना ही रह जायेगा।
इसके अलावा निजी कम्पनियों में भी नौकरी हेतु अंग्रेजी भाषा पर पकड़ का होना बहुत ही आवश्यक है अन्यथा आपके पास कितनी भी बड़ी कोई भी डिग्री क्यों न हो पर आपको एक अच्छी बड़ी कंपनी में नौकरी नहीं मिलेगी क्योंकि आजकल सभी कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं या अपना सामान बेच रही हैं तो अंग्रेजी का ज्ञान होना बहुत ही जरुरी है तो अब तो आपकी समझ में आ गया होगा कि बिन अंग्रेजी सब सून इसलिए जरुरी है की पढ़ते समय से ही हम अंग्रेजी बोलने एवं सिखने का प्रयास करें और जीवन में सफलता प्राप्त करें।

EVM से छेड़छाड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। वकील मनोहर लाल शर्मा की जनहित याचिका पर शुक्रवार(24 मार्च) को जारी किया। शर्मा ने पांच राज्यों हुए चुनावों को मिली भारी जीत पर सवाल उठाया और कहा है वोटिंग मशीनों में छेड़छाड़ की गई है। इसलिए इन मशीनों की अमेरिका के एक्सपर्ट से जांच कराई जाए। गौरतलब है कि यूपी सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद बहुजन समाज पार्टी(बसपा) की मुखिया मायावती और आम आदमी पार्टी(आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। मायावती ने सीधे भाजपा पर आरोप लगाया था कि बहुजन समाज पार्टी के वोट भी भाजपा ने EVM के जरिये इधर से उधर कर दिए और इतनी बड़ी जीत दर्ज की।

चुनाव आयोग ने कहा था की EVM मशीनों में गड़बड़ी की बात एकदम गलत है और EVM से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है तो वहीं भाजपा ने कहा था की मायावती हार से बौखलाकर अनर्गल आरोप लगा रही हैं, लेकिन अब देखना दिलचस्प होगा की चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील देता है।

लाला लाजपत राय को याद रखना

लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 पंजाब के फरीदकोट जिले में हुआ था, इन्होंने कुछ समय हरियाणा के रोहतक और हिसार शहरों में वकालत की। 1880 में उन्होंने कलकत्ता तथा पंजाब विश्वविद्यालय से एंट्रेंस की परीक्षा एक वर्ष में पास की और आगे पढ़ने के लिए लाहौर आए। यहां वे गर्वमेंट कॉलेज में प्रविष्ट हुए और 1982 में एफए की परीक्षा तथा मुख्यारी की परीक्षा साथ- साथ पास की। यहीं वे आर्यसमाज के सम्पर्क में आए और उसके सदस्य बन गये। लाला लाजपत राय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे। बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के साथ इस त्रिमूर्ति को लाल-बाल-पाल के नाम से आज भी जाना जाता है इन्हीं तीनों नेताओं ने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग की थी बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया। वे भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे, लाल जी को पंजाब केसरी भी कहा जाता है। उन्हें ‘पंजाब के शेर’ की उपाधि भी मिली थी।

लाला लाजपत राय ने अपने जीवन की परवाह न करते हुए हमेशा हमेशा देश की स्वाधीनता के आंदोलन में बढ़-चढ़कर ना सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि उन्होंने भारत को आज़ादी दिलाने में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। 3 फ़रवरी, 1928 को साइमन कमीशन भारत पहुँचा, जिसके विरोध में पूरे देश में आग भड़क उठी। लाहौर में 30 अक्टूबर, 1928 को एक बड़ी घटना घटी, जब लाला लाजपत राय के नेतृत्व में साइमन कमीशन का विरोध कर रहे युवाओं को बेरहमी से पीटा गया। पुलिस ने लाला लाजपत राय की छाती पर निर्ममता से लाठियाँ बरसाईं। वे बुरी तरह घायल हो गए। इस समय अपने अंतिम भाषण में उन्होंने कहा था “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।” इस घटना के 17 दिन बाद यानि 17 नवम्बर, 1928 को लाला जी ने आख़िरी सांस ली और सदा के लिए अपनी आँखें मूँद लीं।

लेकिन उनका बलिदान बेकार नहीं गया, लाला जी की मृत्यु से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी की मौत का बदला लेने का निर्णय किया। इन जाँबाज देशभक्तों ने लालाजी की मौत के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसम्बर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफ़सर सांडर्स को गोली से मार दिया,सांडर्स ही वो अंग्रेज था जिसने लाला जी पर लाठियाँ बरसाईं थीं। लालाजी के बलिदान के 20 साल के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया और 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजो के राज से आज़ादी मिली। ये आज़ादी हमें लाला राय की तरह अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के बदौलत मिली है इसीलिए उन्हें सदा रखना और उनसे सिख लेते रहना चाहिये।

जीवन को बदलने वाली किताबें

आज के इस लेख में भारतीय लेखकों द्वारा लिखी गईं कुछ प्रेरणादायक पुस्तकों के बारे में जानेंगे जो कि निम्नलिखित हैं

“द रिचेस्ट इंजीनियर” जिसे अभिषेक कुमार ने लिखा है, लेखक अभिषेक कुमार की यह किताब बहुत ही प्रेरणादायक है। यह पुस्तक एक ओर यह बताती है कि एक व्यक्ति किस तरह से अपनी वित्तीय स्थिति को बदल सकता है तो दूसरी तरफ इस पुस्तक को पढ़ने के बाद बहुत ही अधिक प्रेरणा मिलती है की एक व्यक्ति किस प्रकार कठिन परिस्थितियों में से उभर कर एक सफल व्यक्ति बन सकता है।
दूसरी किताब है मराठी में लिखी गयी माती, पंख आणि आकाश यह किताब भी बहुत ही प्रेरणादयक है, इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत ज्ञानेश्वर मुले ने लिखा है इस किताब में लेखक ने महाराष्ट्र के एक गांव में पैदा हुए बच्चे का एक राजदूत बनने तक के सफर को बताया है जो बहुत ही प्रेरणादायक है।इसी श्रृंखला तीसरी किताब है शिव खेड़ा की बेचना सीखो और सफल बनो, यदि कोई अपना व्यापार करना चाहता है तो यह किताब उन लोगो के लिए बहुत ही प्रेरणा देती है। यह किताब छल कपट नहीं सीखाती है बल्कि एक अच्छा प्रोफेशनल बनाती है, जो भी व्यक्ति प्रोडक्ट, सर्विस या विचार बेचता है वो सेल्समेन कहलाता है बेचना सीखो और सफल बनो” इन्ही सिद्धांतों पर आधारित यह किताब एक सफल प्रोफेशनल बनाने में सहायक है| शिव खेडा ने इसमें सिद्धात शब्द का प्रयोग किया है जोड़-तोड़ का नहीं| क्योंकि सिद्धांतों की बुनियाद ईमानदारी होती है जब की जोड़-तोड़ छल कपट पर टिकी होती है| हमें छल कपट नहीं सीखना है बल्कि एक अच्छा प्रोफेशनल बनना है|

चौथी किताब है शिव खेड़ा की ही “जीत आपकी” इसका अंग्रेजी नाम है “यू कैन विन” इस किताब से भी बहुत प्रेरणा मिलती है कि कैसे सबकुछ तबाह हो जाने के बाद भी आप अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ सकते है और सफलता हासिल कर सकते हैं, इसी का एक उदहारण भी इस किताब में दिया गया है की कैसे “1914 में, थॉमस एडिसन ने 67 साल की आयु में आग लगने की वजह से अपनी फैक्ट्री खो दी थी| फैक्ट्री का इन्सुरंस भी काफी कम था एडिसन ने अपने जिंदगीभर के संघर्ष को देखा और कहा, “आपदा का बहोत महत्त्व है, आपदा में हमारी सारी गलतिया जल जाती है” खुद तबाह होने की बजाये, आपदा के तीन हफ्तों बाद ही उन्होंने फोनोग्राफ की खोज की|

समय आपकी मुट्ठी में के लेखक हैं विजय अग्रवाल यह पुस्तक पूर्ण रूप से आपको आपके समय का सही सदुपयोग करने की प्रेरणा देती हे और सिखाती भी है की समय का सदुपयोग कैसे किया जाता है| शिव खेड़ा की “आज़ादी से जियें” भी बहुत ही प्रेरणादायक किताब है, आप इन सब किताबों को पढ़कर और उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं|

भारत में शिक्षा का इतिहास

भारत में शिक्षा का बहुत पुराना इतिहास रहा है। वर्तमान में यहाँ शिक्षा मुख्यतः सार्वजनिक संस्थानों से प्रदान की जाती है जिसमें नियंत्रण एवं वित्तपोषण तीन स्तरों से आता है – केन्द्र, राज्य एवं स्थानीय निकाय। 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया है। 2009 में भारतीय संसद द्वारा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित किया गया ।

यदि भारत में शिक्षा के इतिहास की बात करें तो प्राचीन समय में विद्यालय नहीं हुआ करते थे तब अधितकर गुरुकुल होते थे और गुरुकुलों की स्थापना प्राय: वनों, उपवनों तथा ग्रामों या नगरों में की जाती थी। वनों में गुरुकुल बहुत कम होते थे। अधिकतर दार्शनिक आचार्य निर्जन वनों में निवास, अध्ययन तथा चिन्तन पसन्द करते थे। भारतीय शिक्षा में बदलाव का दौर अंग्रेजों के शाशनकाल के समय से प्रारम्भ हुआ जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1780 कोलकाता में मदरसा स्थापित किया और फिर 1791 में बनारस में संस्कृत कॉलेज की स्थापना करवाई। 1873 में एक आज्ञापत्र के द्वारा शिक्षा में धन व्यय करने का निश्चय किया गया। वुड का घोषणापत्र (वुड्स डिस्पैच) सर चार्ल्स वुड द्वारा बनाया सौ अनुच्छेदों का लम्बा पत्र था जो 1854 में आया था। इसमें भारतीय शिक्षा पर विचार किया गया और उसके सम्बन्ध में सिफारिशें की गई थीं। चार्ल्स वुड उस समय ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के “बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल” के सभापति थे।

1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के समय ही कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई में विश्वविद्यालय स्थापित हुए और 1870 में बाल गंगाधर तिलक और उनके सहयोगियों द्वारा पूना में फर्ग्यूसन कालेज की स्थापना, 1872 में एक कमीशन गठित किया जिसे “भारतीय शिक्षा आयोग” कहा गया एवं 1886 में आर्यसमाज द्वारा लाहौर (पाकिस्तान) में दयानन्द ऐंग्लो वैदिक कालेज की स्थापना और भारतीय शिक्षा में बड़ा परिवर्तन 1904 में आया जब भारतीय विश्वविद्यालय कानून बना, 1911 में गोपाल कृष्ण गोखले ने प्राथमिक शिक्षा को नि:::शुल्क और अनिवार्य करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। भारत को आज़ादी 1947 में मिली और 1951 में खड़गपुर में प्रथम आईआईटी की स्थापना हुई इससे भारतीय छात्रों को देश में ही तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला ।

भारत के शिक्षा इतिहास में 1961 का साल बहुत महत्त्वपुर्ण साल कहा जा सकता है जब NCERT और प्रथम दो भारतीय प्रबन्धन संस्थान (IIM) अहमदाबाद एवं कोलकाता में स्थापना हुई और इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए तत्कालीन सरकारों ने महत्वपुर्ण कदम उठाये और इस सबमें सबसे प्रशंसनीय कदम 2009 में प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित किया था और आज हम कह सकते हैं की आज भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ऊँचा मकाम हासिल कर लिया है और यहाँ पर विदेशों से भी छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं और भारतीय छात्रों को तकनीकी के क्षेत्र में विदेशी कंपनियाँ अपने यहाँ काम करने के लिए एक अच्छा मेहनताना देती हैं ।

EVM मशीन पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

हाल ही में हुए पाँच राज्यों के चुनावों के नतीजों के बाद EVM मशीन सवालों में है और अब सुप्रीम कोर्ट वकील एम् एल शर्मा की याचिका पर चुनावों में EVM के इस्तेमाल पर रोक लगाने हेतु 24 मार्च को सुनवाई करेगा, इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट अक्टूबर 2013 में EVM से मतदान को असुरक्षित बता चुका है ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा को अप्रत्याशित जीत मिली थी भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कुल 403 सीटों में से 325 पर जीत दर्ज की है और उसी के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने EVM में फर्ज़ीवाड़े की बात कही थी और पिछले सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस कर EVM पर सवाल खड़ा किया था, 2009 के लोकसभा के चुनावों में हार के बाद स्वयं भाजपा EVM पर सवाल खड़ा कर चुकी है ।

दरअसल ज्यादातर जानकर पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत निश्चित मान रहे थे लेकिन आम आदमी पार्टी को सिर्फ 20 सीटें ही प्राप्त हुईं और एक उम्मीदवार को तो 0 वोट प्राप्त हुए तो ये कैसे संभव है की उम्मीदवार और उसका परिवार उसके लिए वोट न करे, अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आता है ।