गुरमेहर विवाद पर गंभीर ने दिया सहवाग को जवाब

सोशल मीडिया पर २० साल की छात्रा गुरमेहर कौर को ट्रोल करने के मामले मैं पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज़ वीरेन्द्र सहवाग को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है जिस तरह से उन्होंने गुरमेहर की भावनाओं का मज़ाक उड़ाया ये किसीको भी पसंद नहीं आया l सोशल मीडिया जहाँ एक तरफ खुद गुरमेहर सहवाग द्धारा ट्रोल किये जाने से दुखी हैं और गुरमेहर लिखती हैं की मेरे खिलाफ ट्रॉल्स को भड़काने के लिए सहवाग का शुक्रिया जिन्हें कभी मैंने अपना हीरो माना था आज वही मेरे खिलाफ लोगों को भड़का रहे हैं l इसके अलावा सहवाग की आलोचना टेलीविज़न मीडिया भी कर रहा है और जावेद अख्तर जैसी बड़ी हस्तियां भी सहवाग की आलोचना कर रही हैं l

पर आज इसमें नया मोड़ तब आया जब वीरेंद्र सहवाग के साथी रहे सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर ने एक विडियो जारी कर वीरेंद्र सहवाग और दूसरे लोगों पर निशाना साधा जो गुरमेहर कौर को देशद्रोही बता रहे थे, अपने इस विडियो मैं गौतम गंभीर ने दिखाया है की वो भारतीय फौज का सम्मान सबसे ज्यादा करते हैं और वो गुरमेहर कौर से सहमत नहीं हैं की युद्ध ने गुरमेहर के पिता को मारा है पाकिस्तान ने नहीं लेकिन आगे इस विडियो में दिखाया गया है की हो सकता है मै गुरमेहर से सहमत नहीं हूं पर लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार होता है चाहे हम उससे सहमत हों या ना हों क्योंकि भारत एक लोकतंत्र है तो यहाँ सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है, किसी को भी एक बयान के आधार पर देशद्रोही नहीं ठहराया नहीं जा सकता है और यही विडियो अब सहवाग के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है जहाँ एक तरफ सहवाग गुरमेहर को देशद्रोही बताने वालों को और उकसाने का काम कर चुके थे वहीं गौतम गंभीर का विडियो उन सब तथाकथित राष्ट्रवादियों की पोल खोलता दिखाई पड़ता है जो अभिव्यक्ति की आज़ादी को मार देना चाहते हैं l

शायद बहुत कम लोगों को यह बात पता हो की गंभीर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को अपना आदर्श मानते हैं इसीलिए उन्होंने इस विडियो के जरिये उन्होंने उन लोगों पर निशाना निशाना साधा है जो सरकार से सवाल पूछने वालों को देशद्रोही बताते हैं, जैसे की ऊपर बताया गया है की गंभीर के आदर्श शहीद-ए-आज़म भगत सिंह हैं जिनका मानना था की किसी के भी विचारों को दबाया नहीं जा सकता यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है और अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ है l गंभीर के इस विडियो के बाद अब सहवाग की तरफ से सफाई भी आ गयी है की उन्होंने ये सिर्फ एक मज़ाक के तौर पे किया था और गुरमेहर को ठेस पहुँचाना उनका मकसद नहीं था और वो अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ नहीं हैं l

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