भ्रष्ट कांग्रेस 07 विधायक नहीं जुटा पाई ईमानदार भाजपा ने 20 जुटा लिये !

अभी हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में जहाँ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को एक बहुत बड़ा बहुमत मिला वहीं पंजाब, मणिपुर और गोवा की जनता ने भाजपा को नकार दिया, उत्तर प्रदेश में भाजपा को 403 में से 325 सीटें प्राप्त हुईं तो उत्तराखंड में भी 70 में से 57 सीटें मिलीं मतलब एकतरफ़ा दोनों राज्यों में एकतरफा जीत हासिल की, लेकिन पंजाब में भाजपा सिर्फ 03 सीट ही हासिल कर पाई और उसका सहयोगी दल अकाली सिर्फ 15 सीट हासिल कर पाया और वहाँ कांग्रेस ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की इसके अलावा गोवा जहाँ कुल 40 विधानसभा सीट हैं वहाँ कांग्रेस को 17 सीट मिलीं और मणिपुर की 60 सीटों में से कांग्रेस को 28 सीटें प्राप्त हुईं यानि दोनों जगह बहुमत नहीं मिल पाया ।

गोवा में जहाँ बहुमत के लिए सिर्फ 04 सीट चाहिए थीं तो वहीं मणिपुर में उसे (कांग्रेस) 03 सीटें चाहिए थीं अर्थात दोनों जगह कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी और उसे वहाँ सरकार बनाने का मौका पहले मिलना चाहिए था और शायद यही कांग्रेस की भी सोच रही होगी की दोनों जगह के राज्यपाल कांग्रेस को ही पहले बुलायेंगे सरकार बनाने के लिए लेकिन कांग्रेस यही सोचती रह गयी और हमेशा बड़ी -बड़ी बातें करने वाले प्रधानमंत्री की नेतृत्व वाली भाजपा ने दोनों जगह अपनी सरकार बना ली यहाँ सोचने वाली बात ये है की दोनों जगह ही मणिपुर और गोवा में भाजपा को कांग्रेस की सीट भाजपा से ज्यादा थीं, पर भाजपा ने मणिपुर में भी और गोवा में भी 10 विधायकों इंतेज़ाम कर लिया पर और मणिपुर में तो सरकार बनने से पहले ही एक विधायक भाजपा में शामिल हो गया ।

यहाँ सवाल ये उठता है कि क्या ये विधायक अपनी मर्ज़ी से भाजपा में शामिल हुए या इनकी खरीद फरोख्त हुई जैसा कि आम भाषा में कहा जाता है ‘HORSE TRADING’, क्योंकि भाजपा का इतिहास कुछ ऐसा ही रहा है और यहाँ पे दिलचस्प बात ये है की जो लोग भाजपा की राजनीती के एकदम विरुद्ध थे वो भी भाजपा को समर्थन दे रहे हैं उदाहरण के लिए गोवा में विजय सरदेसाई ने एक अलग पार्टी बनाई और पूरा चुनाव भाजपा के खिलाफ प्रचार करके चुनाव लड़ा और 03 सीट भी प्राप्त कीं और अब वो भाजपा की नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बन गए हैं क्या वो बिना पैसा लिए ही भाजपा में शामिल हो गए ये सब देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सोने का चमच लेके पैदा होने वाले राहुल गाँधी जैसा की नरेंद्र मोदी उन्हें कहते हैं 07 विधायक नहीं जुटा पाए वहीँ खुद को चायवाला कहने वाले नरेंद्र मोदी ने 20 से भी ज्यादा जुटा लिए ।

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