भाजपा सांसदों ने ही कराई मोदी की किरकिरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार बीजेपी सांसदों को संसद की कार्यवाही के दौरान सदन में अपनी अटेंडेंस बढ़ाने की नसीहत दे चुके हैं, लेकिन लगता नहीं कि बीजेपी सासंदों पर इसका कोई असर हुआ है। बीजेपी सांसदों के इसी रवैये के चलते सोमवार को सदन में सरकार की किरकरी हो गई। दरअसल, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक संसद में पास तो हुआ लेकिन विपक्ष का एक संशोधन मंजूर हो गया। ऐसा एनडीए के सांसदों की गैरमौजूदगी के चलते हुआ। बताया जा रहा है इस घटनाक्रम से पीएम मोदी बेहद नाराज हैं। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, ऐसे में संशोधित बिल को लोकसभा से दोबारा पास करवाना होगा। वहां से पास होने के बाद राज्यसभा में फिर बिल आएगा।

इससे पहले राज्य सभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने संविधान संशोधन बिल राज्यसभा में पेश किए। गहलोत ने इन विधेयकों के मकसद और कारणों का जिक्र करते हुए कहा है कि इन विधेयकों के जरिए देश में पिछड़े वर्गों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की तर्ज पर पिछड़ा वर्ग आयोग को भी संवैधानिक दर्जा दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि 1993 में गठित पिछड़ा वर्ग आयोग अभी सिर्फ सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ी जातियों को पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल करने या पहले से शामिल जातियों को सूची से बाहर करने का काम करता था। प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों के तहत नए आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य शामिल होंगे।

मजबूर हो गए मोदी
बिल को पास कराने के दौरान तब असाधारण स्थिति पैदा हुई जब विपक्ष खासकर कांग्रेस सदस्यों का संशोधन पास हो गया। इसमें कांग्रेस का संशोधन था कि ओबीसी कमीशन में एक महिला और एक अल्पसंख्यक मेंबर भी हो। इस संशोधन का सरकार ने विरोध किया। लेकिन नियम के हिसाब से सरकार संशोधित बिल के साथ ही आगे बढ़ सकती थी। इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों सदस्यों के बीच तीखी झड़प भी हुई। बीजेपी ने कांग्रेस को ओबीसी विरोधी बताया तो कांग्रेस ने कहा कि वह महिला को इसमें नहीं रखना चाहती है। बीच का हल निकालने के लिए बीच में सदन का काम 10 मिनट भी रोका गया। लगभग एक घंटे तक चली बहस के बाद सरकार संशोधित बिल को पास कराने पर मजबूरन मंजूर हो गई। अब यह बिल लोकसभा में जाएगा। लेकिन अब यह देखना होगा कि क्या सरकार लोकसभा में वह विपक्ष के संशोधन के साथ ही पास करवाती है या पुराने बिल को ही पास कर दोबारा राज्यसभा में लौटाती है।

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