युद्ध समस्या का समाधान नहीं– सुषमा स्वराज


भारत की विदेशनीति और सामरिक भागीदारों के साथ तालमेल विषय पर गुरुवार(3 अगस्त) को राज्यसभा में चर्चा के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विपक्ष के सभी आरोपों का करारा जवाब दिया। सुषमा स्वराज ने कहा कि ‘नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू) ने निजी सम्‍मान कमाया, प्रधानमंत्री मोदी ने विश्‍व में भारत को सम्‍मान दिलाया।’ इस दौरान सुषमा ने सभी विश्व के सभी देशों के साथ भारत के संबंधों पर विपक्ष को करारा जवाब दिया।

सुषमा ने कहा कि भारत ने मोदी सरकार के आने के बाद अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों को नई उंचाईयों पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि हमने अपने सभी पड़ोसियों का साथ दिया और जो चीन हमें श्रीलंका में घेर रहा था, उसके खतरे को हमनें कम किया। इस दौरान विदेश मंत्री कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हम हर संभव संबंधों को बेहतर कर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी ने संकट के वक्त चीनी राजदूत से मुलाकात की। डोकलाम मुद्दे पर कहा कि ‘सबसे बड़े प्रमुख विपक्षी दल के नेता (राहुल गांधी) ने चीन की स्थिति जानने के लिए भारत के नेतृत्‍व को पूछने के बजाय, चीनी राजदूत से मुलाकात की। आप (आनंद शर्मा) भी उस मीटिंग में मौजूद थे।

सुषमा ने आगे कहा कि ‘पहले विपक्ष को भारत का दृष्टिकोण समझाना चाहिए था, उसके बाद चीनी राजदूत को बताना चाहिए था कि ये हमारा पक्ष है।’ उन्होंने कहा कि किसी भी समस्‍या का समाधान युद्ध से नहीं निकलता। युद्ध के बाद भी संवाद करना पड़ता है। तो बुद्धिमत्‍ता ये है कि बिना लड़े सब सुलझा लो।

सुषमा ने कहा कि सेना है, युद्ध के लिए तैयार है, लेकिन युद्ध से समाधान नहीं निकलता। आपने(विपक्ष) कहा कि अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाइए तभी पड़ोसियों को लगेगा कि हम मजबूत हैं। आज सामरिक क्षमता नहीं, आर्थिक क्षमता से तय होता है कि कौन ज्‍यादा मजबूत है। मैं चाहती हूं कि भारत के विकास में पड़ोसी देशों को भी लाभ हो। हमारी जो आर्थ‍िक क्षमता बढ़ रही है, उसमें बड़ा हिस्‍सा चीन से आता है। अगर द्विपक्षीय चर्चा होगी तो निश्चित तौर पर समाधान निकलेगा।

नेपाल से रिश्तों की बात करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि नेपाल में तबाही के समय सब मानकर चल रहे थे कि चीन नेपाल के लिए आगे आएगा। भारत सरकार ने सबसे पहले मदद पहुंचाई। उन्होंने कहा कि नेपाल त्रासदी के वक्त नेपाल की सबसे ज्यादा मदद भारत ने की। हमनें 1 बिलियन डॉलर की मदद दी।

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