खुलासा गुजरात,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनाव में चोरी हुई ईवीएम :आरटीआई


आज एक आरटीआई के जरिये यह चोंकाने वाला सच सामने आया है कि तीन राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थीं और आज भी हैं वहाँ पर चुनाव के समय या उससे पहले ईवीएम वोटिंग मशीन चोरी हुईं। यह तीन राज्य हैं गुजरात,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जहां पर भाजपा की सरकारें हैं। 2007 गुजरात में जब ये चोरी हुई तब वहाँ के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी थे, उस चोरी में तीन व्यक्ति पकड़े गए थे और तीनों का दो बार लाई डिटेक्टर टेस्ट भी हुआ था। लेकिन जिस लैब ने यह टेस्ट किया उड़ने पुलिस से फिर से लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने के लिए कहा था। आरटीआई में कहा गया है कि इस दिशा में सकारात्मक जांच चल रही है और अधिक जानकारी के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करें, पर यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि ये मामला 2008 से लंबित है तो तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की। 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन गए थे।

आरटीआई


यह जानकारी आरटीआई द्वारा पूनावाला बंधुओं ने हासिल की है जो कि कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। इस आरटीआई के सामने आने के बाद चुनाव आयोग की मुश्किलें बढ़ गईं क्योंकि चोरी हुई मशीन वापिस मिल गयी हैं तो क्या उनमें कोई छेड़छाड़ हुई क्या किसी पार्टी विशेष को उससे फायदा पहुंचाया गया ये सारे सवाल हैं जिनके जवाब चुनाव आयोग को देने होंगे।

दरअसल, जब से पाँच राज्यों गोवा,पंजाब,उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के चुनाव हुए हैं और उनका परिणाम घोषित हुआ है उसी समय से ईवीएम वोटिंग मशीन चर्चा में बनी हुई है। जब चुनावों के परिणाम घोषित हुए तो सबसे पहले बहुजन समाजवादी पार्टी की मुख्या मायावती ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए।

उसके बाद लगभग सभी दलों ने इस मुद्दे को उठाया जिसमें सबसे अग्रसर रही आम आदमी पार्टी।आम आदमी पार्टी और सभी पार्टियों की भी यही माँग थी कि ईवीएम मशीनों की जांच हो क्योंकि कई जगह पर ईवीएम मशीन का कोई भी बटन दबाने पर वोट सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को ही जा रहा था। बहुत से मतदान केंद्रों पर ऐसा भी हुआ कि जितने रजिस्टर्ड वोट थे उससे ज्यादा मतदान हुआ या जितना मतदान हुआ उससे ज्यादा मतगणना हुई ऐसा ही एक मामला दिल्ली के छतरपुर वार्ड का है जहाँ आम आदमी को की प्रत्याशी सिर्फ एक वोट से चुनाव हार गई। यहाँ जितने वोट पड़े उससे 45 वोटों की गिनती ज्यादा हुई। यह मामला अभी कोर्ट में लंबित है। उत्तराखंड में भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 8 विधानसभा सीटों की ईवीएम सील करने का आदेश दिया हुआ है।

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