इस सरकारी विद्यालय में 900 बच्चे प्राइवेट विद्यालय से आये हैं!


जब भी भारत में कोई  भी कोई चुनाव होता है लोकसभा का या फिर विधानसभा का सभी राजनीतिक दल ये वादा जरूर करते हैं कि हम भारत के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर प्राइवेट विद्यालयों से भी अच्छा कर देंगे । यह आज़ादी के बाद से ही सभी दल बोलते आये हैं और सभी नेता चाहे वो देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू हों या फिर इस समय के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी सरकारी विद्यालयों की हालत जस की तस बनी हुई है। सरकारी विद्यालयों में अच्छी पढ़ाई तो दूर की बात है सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए कमरे तक नहीं होती। यदि बारिश हो जाये तो छुट्टियां हो जाती हैं, पर्याप्त शिक्षक नहीं होते है जो बच्चों को पढ़ा सकें। पीने का पानी यहाँ तक कि सरकारी विद्यालयों में शौचालय तक नहीं होते हैं। ऐसी ही तमाम समस्या हैं इसी की वजह से सभी माँ-बाप अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट विद्यालयों में भेजने के लिए मजबूर हैं।

लेकिन देश में पहली बार एक ऐसी सरकार बनी है जिसने जो वादा किया था उसे पूरा कर रही है और वो है दिल्ली की आम आदमी पार्टी की दिल्ली की सरकार जिसने सिर्फ भाषण नहीं दिये बल्कि ज़मीन पर काम कर रही है। अब दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर लैब हैं, एयर कंडीशन लग रहे हैं, सीसीटीव कैमरे हैं और तो और स्विमिंग पूल तक भी हैं। 

इन सब सुविधाओं से लैस रोहिणी सेक्टर21 के सरकारी विद्यालय में 900 बच्चे प्राइवेट विद्यालय से आये हैं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था इसके लिए दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने बहुत सारे कदम उठाए हैं जैसे कि शिक्षा का बजट लगातार 2 साल से 25% है जो कि भारत में किसी भी राज्य में शिक्षा का बजट सबसे ज्यादा है। इसी के कारण दिल्ली सरकार अपने शिक्षकों एवं प्रधानचार्य को आईआईएम और विदेश में कैम्ब्रिज व होवार्ड जैसे संस्थानों में ट्रेनिंग के लिए भेज पाई और इस सबका ही नतीजा है कि पिछले 2 वर्षों से दिल्ली सरकार के विद्यालयों का कक्षा 12 का परिणाम प्राइवेट विद्यालयों से बेहतर आ रहा है। ऐसा ही यदि सारे राज्यों के सरकारी विद्यालय बन जायें तो यकीनन भारत मे जो शिक्षा के नाम पर धंधा चल रहा है वो बंद हो जाएगा।

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