गुजरात : मुसलमानों ने साफ़ किये मंदिर, कर रहे हैं बाढ़ पीड़ितों की मदद


देश के कई राज्यों में भयंकर बाढ़ आई हुई है, असम, राजस्थान, गुजरात और उड़ीसा बाढ़ की चपेट में हैं। गुजरात में तो स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हवाई जायजा लिया और केन्द्र सरकार ने 500 करोड़ का पैकेज दिया है, जो बहुत ही कम है। नुक़सान इससे कहीं अधिक हुआ है। लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं और खाना खाने के लिए सरकार और दूसरे सामाजिक संगठनों पर निर्भर हैं।

लेकिन मुल्क में जब नफरत का माहौल फैलाया जा रहा है हिंदुओं को मुस्लिम के खिलाफ और मुस्लिम को हिन्दू के खिलाफ भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हों ऐसे समय में गुजरात में आई प्राकृतिक आपदा ने हिन्दू-मुस्लिम सबको एक कर दिया है.

यहां मुस्लिम नौजवान ना सिर्फ लोगों की मदद कर रहे हैं, अपितु मंदिरों में जो पानी भर जाता है उसे भी वही साफ करते हैं और मंदिर की साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं जिससे कि पूजा पाठ करने वाले लोगों को पूजा अर्चना करने में दिक्कत ना हो। इसे यहाँ इसे एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है और लोग आपस में मिलकर राह रहे हैं।

गुजरात में आर्मी के साथ-साथ कई अन्य संगठन और स्वयंसेवक के लोगों की मदद कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्रीय दलित मोर्चा जैसे संगठन लोगों की मदद में लगे हुए हैं और लोगों के खाने,रहने और सोने के लिए मुहैया करा रहे हैं।

भारत में महिलाओं के लिए कानून

भारत में यूँ तो महिलाओं को दुर्गा और लक्ष्मी का रूप माना जाता है और नवरात्रों में कन्या पूजन भी किया जाता है लेकिन इन सब के बावजूद भी प्राचीनकाल से ही महिलाओं के साथ बहुत अत्याचार और दुर्व्यवहार होता आ रहा है और ये अभी भी बदस्तूर जारी है और इस सब को रोकने के लिए देश के संविधान में महिलाओं के लिए कई कानून हैं आज हम उनमें से कुछ कानूनों पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे जो कि निम्नलिखित हैं :

संपत्ति पर हक:
कानूनी जानकार बताते हैं कि सीआरपीसी, हिंदू मैरिज ऐक्ट, हिंदू अडॉप्शन ऐंड मेंटिनेंस ऐक्ट और घरेलू हिंसा कानून के तहत गुजारे भत्ते की मांग की जा सकती है। अगर पति ने कोई वसीयत बनाई है तो उसके मरने के बाद उसकी पत्नी को वसीयत के मुताबिक संपत्ति में हिस्सा मिलता है। लेकिन पति अपनी खुद की अर्जित संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है।

घरेलू हिंसा से सुरक्षा:
महिलाओं को अपने पिता के घर या फिर अपने पति के घर सुरक्षित रखने के लिए डीवी ऐक्ट (डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट) का प्रावधान किया गया है। महिला का कोई भी डोमेस्टिक रिलेटिव इस कानून के दायरे में आता है।

लिव-इन रिलेशन में भी डीवी ऐक्ट:
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट के तहत प्रोटेक्शन मिला हुआ है। डीवी ऐक्ट के प्रावधानों के तहत उन्हें मुआवजा आदि मिल सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए देश में नियम तय किए गए हैं। ऐसे रिश्ते में रहने वाले लोगों को कुछ कानूनी अधिकार मिले हुए हैं।

सेक्शुअल हैरेसमेंट से प्रोटेक्शन:
सेक्शुअल हैरेसमेंट, छेड़छाड़ या फिर रेप जैसे वारदातों के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। महिलाओं के खिलाफ इस तरह के घिनौने अपराध करने वालों को सख्त सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। आईपीसी की धारा-375 के तहत रेप के दायरे में प्राइवेट पार्ट या फिर ओरल सेक्स दोनों को ही रेप माना गया है।

वर्क प्लेस पर प्रोटेक्शन:
वर्क प्लेस पर भी महिलाओं को तमाम तरह के अधिकार मिल हुए हैं। सेक्शुअल हैरेसमेंट से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में विशाखा जजमेंट के तहत गाइडलाइंस तय की थीं। इसके तहत महिलाओं को प्रोटेक्ट किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की यह गाइडलाइंस तमाम सरकारी व प्राइवेट दफ्तरों में लागू है। इसके तहत एंप्लॉयर की जिम्मेदारी है कि वह गुनहगार के खिलाफ कार्रवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने 12 गाइडलाइंस बनाई हैं। मालिक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह सेक्शुअल हैरेसमेंट को रोके।