गोवा का CM बनने के लिए रक्षामंत्री का इस्तीफा

भारत के रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है ऐसा उन्होंने इसलिए किया है ताकि वो गोवा के मुख्यमंत्री बन सकें । वैसे तो भाजपा के पास गोवा में बहुमत नहीं है या यूँ कहें की बहुमत से बहुत दूर है क्योंकि बहुमत के लिए 40 सीट वाली गोवा विधानसभा में 21 सीट चाहिए जबकि भाजपा को कल आये गोवा विधानसभा के चुनावो में सिर्फ 13 सीट ही मिली हैं , जबकि कांग्रेस को 18 सीट प्राप्त हुई हैं ।

परंतु गोवा फॉरवर्ड पार्टी जिसे 03 सीट मिली हैं और एक निर्दलीय ने भी भाजपा को समर्थन की चिट्ठी दे दी है और शर्त ये है की मनोहर पर्रिकर ही गोवा के मुख्यमंत्री बनें लेकिन यदि देखा जाये तो ये भाजपा का सत्ता का लालच है जो देश का रक्षामंत्री अपना पद त्याग कर मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार है और वो भी जब तब बहुमत भी पूरा न हो ।

देखना दिलचस्प होगा क्या भाजपा सदन में बहुमत हासिल कर पाती है की नहीं ?

भाजपा नेता नरसिम्हा राव ने मानी EVM में गड़बड़ी की बात

बीजेपी के प्रवक्ता जी वी एल नरसिम्हा राव हैं जिन्हें आप दिन रात टीवी पर देखते हैं। उस किताब की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने, जो अब मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा हैं पार्टी में।

जीवीएल नरसिम्हा राव की यह पुस्तक, ‘Democracy at Risk/Can We Trust Our Electronic Voting Machines?’ 2010 में प्रकाशित हुई थी जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी का खुलासा किया गया है। इसकी प्रस्तावना एलके आडवाणी ने लिखी है और इन दोनों विद्वानों ने मांग की है कि दुनिया के तमाम विकसित देशों की ही तरह EVM से मतदान बंद कराया जाय या इसके साथ अमेरिका की तरह Voter Verified Paper Audit Trail (VVPAT) प्रणाली की व्यवस्था की जाय।

इसलिए बीजेपी प्रेमी मित्रों, ये मत समझियेगा कि केवल बीजेपी के जीतने पर ही EVM का रोना रोया जाता है। 2009 में कांग्रेस जीती थी तो इतने बड़े राष्ट्रवादी नेताओं को किताब लिखनी पड़ गयी थी। इनसे उखड़ा कुछ नहीं, ये अलग बात है। ज़ाहिर है, अब मायावती भी क्या कर लेंगी! कहने का मतलब केवल इतना है कि ईवीएम को लेकर चिंताएं सुस्थापित हैं, स्वीकार्य हैं और कतई भाजपा विरोधी नहीं हैं।

जो कोई EVM पर सवाल उठा रहा है उसे लोकतंत्र की चिंता है। बीजेपी को 2010 में लोकतंत्र की चिंता थी। आज मायावती को है। मज़ा ये कि सत्ता में पहुँचते ही सबके लिए EVM ठीक हो जाता है। शायद इसीलिए EVM कभी ठीक नहीं हो पाता और मज़ाक बन कर रह जाता है।

मोदी का अपराधमुक्त उत्तरप्रदेश मिशन शुरू

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव जीतते ही दयाशंकर सिंह को फिर से पार्टी में ले लिया गया है। दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अपशब्द कहे थे। पार्टी ने पहले उन्हें छह साल के लिए निलंबित किया था। अब यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने उनके निष्काषन को वापस ले लिया है। गौरतलब है कि मायावती पर हमला करके चर्चा में आई दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह ने हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। वह बीजेपी की टिकट पर सरोजनी नगर से चुनाव लड़ी थीं। दयाशंकर के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। लेकिन बाद में वह रिहा हो गए थे।
दयाशंकर सिंह के निष्कासन के बाद स्वाति सिंह ने अपने और बेटी के खिलाफ दिए गए आपत्त‍िजनक बयानों पर जिस तरह बीएसपी पर हल्ला बोला था, उससे वे रातोंरात चर्चा में आ गईं थीं। बीजेपी ने उन्हें अपने महिला मोर्चा का अध्यक्ष भी बनाया गया था।
यह है मामला: दयाशंकर सिंह जुलाई महीने में ही यूपी बीजेपी के उपाध्‍यक्ष बनाए गए थे। इसके कुछ दिन बाद उन्‍होंने एक विवादास्‍पद बयान दिया। उन्‍होंने कथित तौर पर मायावती की तुलना वेश्या से की थी। इसके बाद, मायावती ने यह मामला राज्‍यसभा में उठाया। बीजेपी तुरंत बैकफुट पर आ गई। सदन में जेटली ने निजी तौर पर दुख जताया। पार्टी ने पहले दयाशंकर को सस्‍पेंड किया और बाद में छह साल के लिए बाहर का रास्‍ता भी दिया दिया। हालांकि, बसपा कार्यकर्ता इससे संतुष्‍ट नहीं हुए और वे प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आए। बसपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर दयाशंकर की पत्‍नी और बेटी के बारे में भद्दी टिप्‍पणी की। इसके बाद, दयाशंकर की पत्‍नी ने मायावती और बसपा के कुछ अन्‍य नेताओं के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराते हुए गिरफ्तारी की मांग की। बीजेपी भी बसपा के खिलाफ सड़कों पर उतर आई और जमकर प्रदर्शन किया।

अब मिस्बाह ने मारे लगातार 6 छक्के

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के टेस्ट कैप्टन और बल्लेबाज मिसबाह उल हक का नाम उन चंद खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जिन्होंने लगातार 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाए हैं। 42 वर्षीय इस अनुभवी और आक्रामक खिलाड़ी ने हॉन्ग-कॉन्ग टी20 ब्लिट्स टूर्नामेंट में अपनी टीम हॉन्ग-कॉन्ग आइलैंड की ओर से लगातार 6 छक्के लगाए। हालांकि यह एक ही ओवर में नहीं था ।

हंग होम जगुआर्स के खिलाफ खेलते हुए मिसबाह ने 18वें ओवर में गेंदबाज इमरान आरिफ की आखिरी दो गेंदों पर दो छक्के जड़े। अगला ओवर एशले कैडी लेकर आए। हक ने उनकी पहली 4 गेंदों को हवा में खेलते हुए सीमा रेखा के बाहर भेज दिया।

मिसबाह ने 37 गेंदों में 7 छक्के और 4 चौके की मदद से नाबाद 82 रन बनाए। उनकी इस तूफानी पारी की बदौलत टीम का स्कोर 6 विकेट के नुकसान पर 216 रहा। जगुआर्स ने लक्ष्य का पीछा मजबूती से लिकाय लेकिन 20 ओवर में 183 रन ही बना सकी।

महिला दिवस विशेष

छोड़ो मेहँदी खडग संभालो,खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि,मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो,अब गोविंद न आयेंगे!

कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए अखबारों से,

कैसी रक्षा मांग रही हो, दुशासन दरबारों से..

स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं, वे क्या लाज बचायेंगे..

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे..!

कल तक केवल अँधा राजा, अब गूंगा बहरा भी है

होठ सी दिए हैं जनता के, कानों पर पहरा भी है..

तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे, किसको क्या समझायेंगे?

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे…!!

मोदी ने उड़ाए इमरजेंसी फण्ड के 8 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखने के समारोहों के प्रचार व्यय को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि से आठ करोड़ रुपए खर्च किए जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले दिसंबर में शुरू किया गया था। इन परियोजनाओं में अरब सागर में छत्रपति शिवाजी स्मारक का जलपूजन भी शामिल हैं।

लोक निर्माण विभाग ने बजट सत्र के पहले दिन सोमवार (6 मार्च) को महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में वित्त विभाग द्वारा पेश अनुदान की पूरक मांगों में कहा है, ‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक के जलपूजन कार्यक्रम तथा मुम्बई शहरी परिवहन परियोजना के तहत मुम्बई मेट्रोलाइन के उद्घाटन, स्वेरी-न्हावा शेवा परियोजना, नयी रेल परियोजना के विज्ञापन एवं प्रचार के लिए आठ करोड़ रुपए देने का फैसला किया गया। ’

लोक निर्माण विभाग ने कहा कि आकस्मिक निधि से यह रकम इसलिए निकाली गयी क्योंकि खर्च अत्यावश्यक तरह का था। विधानपरिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने आकस्मिक निधि से पैसे निकाले जाने को लेकर सरकार की आलोचना की।

रामजेठमलानी बनाम अरुण जेटली

जब मोदी के आदेश पर CBI ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय पर छापा मारा तो उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा की क्योंकि वो कमीटी का गठन करने वाले थे जो DDCA में हुए भ्रस्टाचार की जाँच करती और चूँकि अरुण जेटली उस समय DDCA के मुखिया थे तो ये कमीटी उनके द्वारा किये गए भ्रस्टाचार की भी जाँच करती इसलिए नरेंद्र मोदी ने केजरीवाल के कार्यालय पर CBI का छापा मरवाया गया ताकि उस जाँच से सम्बंधित कागजातों को CBI अपने साथ ले गयी इस आरोप के बदले अरुण जेटली ने अरविन्द केजरीवाल पर मानहानि का मुक्क़द्दमा कर दिया ।

दिल्ली उच्च न्यायालय में उसी मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें केजरीवाल की तरफ से पैरवी करने वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी मौजूद थे। जेठमलानी ने जेटली से जिरह में उनकी अंग्रेजी से लेकर मान और सम्मान की सामाजिक समझ पर सवालों की बौछार कर दी। एनडीटीवी के मुताबिक, एक मौका ऐसा भी आया जब जेठमलानी ने जेटली से कहा कि मेरी सलाह मानिए, जो पूछा जा रहा है, वही जवाब दीजिए।
राम जेठमलानी ने जेटली से पूछा कि आपने कैसे तय किया कि आपकी जो मानहानि हुई है, उसकी आर्थिक रूप से भरपाई की जा सकती है और ये मानहानि 10 करोड़ की है? इस पर वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि मेरी मानहानि की क्षतिपूर्ति पैसे के आधार पर मुश्किल है। बहरहाल परिवार, दोस्तों या समाज के बीच जो मेरा महत्व या साख है, उस आधार पर 10 करोड़ का दावा किया है।
जेटली ने कहा कि केजरीवाल ने उन पर झूठे आरोप लगाए हैं। जो कीमत उन्होंने कोर्ट के समक्ष रखी है, वह उनकी क्षति का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। इन आरोपों से उन्हें भारी मानसिक पीड़ा हुई है। उनकी छवि व कद के हिसाब से उनकी जो क्षति हुई है, उसे रुपयों में नहीं आंका जा सकता। केजरीवाल की तरफ से सफाई देते हुए कहा कि जेठमलानी ने जेटली को याद दिलाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सिर्फ पत्रकार मधु किश्वर द्वारा किए गए ट्वीट को रिट्वीट किया था। इस पर जेटली ने कहा कि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर गैर जिम्मेदाराना बयान दिया है, लेकिन जब एक मुख्यमंत्री उन्हें समर्थन देता है, तो यह गंभीर अपराध बन जाता है।
जेठमलानी ने जेटली से पूछा कि आपको केजरीवाल से कोई दुश्मनी नहीं है? इस पर जेटली ने कहा कि मुझे कोई निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन मुझे उनका नहीं पता। एक बार वो डीडीसीए का प्रेजीडेंट का चुनाव लड़े और हार गए। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेरे खिलाफ जमकर प्रचार किया।
जेटली ने कहा कि चुनावों में कई फैक्टर होते हैं सिर्फ प्रत्याशी के साख का सवाल नहीं होता। याद रहे कि केजरीवाल भी 2014 लोकसभा का चुनाव वाराणसी में 3.50 लाख वोटों से हारे थे। इस पर जेठमलानी ने जेटली से कहा कि मेरी सलाह मानिए, जो आपसे पूछा जा रहा है, वही जवाब दीजिए। क्या आप एक लाख से ज्यादा वोटों से हारे थे? इस पर जेटली ने कहा कि सही है।
इस मामले में बहस के दौरान वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी की तरफ से अरुण जेटली के लिए 52 सवाल रखे गए। इनमें से 30 केस से जुड़े सवाल लगे, एक-तिहाई सवालों को कोर्ट की तरफ से अयोग्य करार दिया गया। पूर्व बीजेपी नेता राम जेठलमलानी इस केस को केजरीवाल की तरफ से लड़ रहे हैं।
उच्च न्यायलय में उपस्थित पत्रकारों की मानें तो अरुण जेटली जो खुद पेशे से वकील हैं और देश के वित्त मंत्री भी हैं लेकिन राम जेठमलानी के सामने वो खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं आजतक के मुताबिक तो अरुण जेटली राम जेठमलानी के सवालों से भावुक हो गए, आज दूसरे दिन भी राम जेठमलानी ने ऐसे कई सवाल किये जिनका जवाब देने में अरुण जेटली असहज नज़र आये ।